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PritiS_rivastav

Priti Srivastava ✓

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Communities: Bharatiye Art & Culture
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1
[text] वह बिना शरीर के सबका स्पर्श करता है ,नाक के बिना भी सूंघ लेता है ,सभी गंधो को ग्रहण करता है ।लोक में जो भी घटित होता है ,उसमें भी अलग विधियों से उसके कृत्य अलौकिक है जिसकी महिमा का वर्णन नहीं किया जा सकता।जिसको वेद और प्रत्यक्षदर्शी महापुरुष इस प्रकार गायन करते हैं। जय जय श्रीराम
Bharatiye Art & Culture 250 0.0x 29 Aug 14
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[text] पहले तो विषयरुपी वारी है जिसमें संसार निमग्न है।सद्गुरु की कृपा से संयम सध गया तो ब्रह्मपीयूष रूपी वारि प्राप्त होने लगता है और दर्शन -स्पर्श -स्थिति मिलने पर वह परमात्मा भी अलग नहीं रह जाता ,तो वह है पूर्ण पंडित, ज्ञानी !वह प्यास से मुक्त हो गये,अन्य की प्यास भी ऐसे महापुरुष ही
Bharatiye Art & Culture 215 0.0x 32 Aug 11
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[image] भगवान के भजन का एक ही परिणाम है दर्शन ,स्पर्श और सदा रहने वाले अमृतमय पद में स्थिति !अमृतमय अनंत जीवन !प्रभु का भजन करने के लिए साधन है नाम और रूप ।दो -ढाई अक्षर का कोई भी छोटा सा नाम ,जो सीधे उन प्रभु का परिचायक हो जैसे ओम् या राम ,उसका जप करें। जय जय श्री राम।🙏🏹🔱⚔️🚩
Bharatiye Art & Culture 189 0.0x 33 Aug 12
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[text] महापुरुष को चाहिए कि स्वयं करते हुए सबसे कराये।महापुरुष जो प्रमाण कर जाता है ,समाज उसी का अनुसरण करता है ।इसलिए वे समाज को कर्म करने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ,क्योंकि कर्म से भाग्य के असाध्य कुअंक भी मिटाये जा सकते हैं। जय जय श्री राम।🚩⚔️🔱🏹🙏
Bharatiye Art & Culture 188 0.0x 20 Aug 10
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[text] परमात्मा जन्मा कब ?वह जियेगा कब तक ?उसका आदि और अंत आज तक कोई नहीं पा सका ,किंतु अपने अनुमान से वेदों ने इस प्रकार गायन किया है कि भगवान कैसे हैं ?वह बिना पैर के ही सर्वत्र चल रहा है ,बिना हाथों के सर्वत्र कार्य कर रहा है ,बिना मुंह के सभी रसों का भोक्ता है ,जुबान है ही नहीं फिर
Bharatiye Art & Culture 184 0.0x 29 Aug 13
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[text] विकृत वासनाओं में आकण्ठ डूबा हुआ यह मन सीधा और परम कल्याणकारी फल देने वाला हो जाता है जब यह सद्गुरु के आश्रित हो जाता है ।सद्गुरु ही शंकर हैं ।सद्गुरु एक सांचा है जिसके अनुरूप ढलते ही जो गुरुत्व सद्गुरु में है ,शिष्य में भी आ जाता है। जय जय श्री राम।🙏🏹🔱⚔️🚩
Bharatiye Art & Culture 145 0.0x 27 Aug 15
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[text] गुरु एक स्थिति है ।कोई विरला लगनशील विरही साधक ही साधन कर गुरु -स्तर तक पहुंच पाता है। जन्म-जन्मांतरों का आपका पुण्य साथ दे तो सद्गुरु छप्पर फाड़कर मिल जाते हैं ।सद्गुरु की प्राप्ति अनेक जन्मों के सुकृत का परिणाम है ,वैसे उनकी प्राप्ति दुर्लभ है । आवागमन से निवृत्ति दिलाने वाले
Bharatiye Art & Culture 131 0.0x 35 Aug 16